बुधवार, 29 फ़रवरी 2012
मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012
होली आई रे
फागुनी बयार चलने लगी है
फागुन ऋतू आई है
मोसम सुहाना होने लगा है
प्रेमियों के अरमान मचलने लगे हैं
वैवाहिक जोड़े भी नए रंग में रंगने लगे हैं
सबपे प्रेम रंग छाने लगा है
भवंरा भी फूलों पर मंडराने लगा है
चारों तरफ मस्ती सी छाई है
लगता है नजदीक ही होली आई है
रंग ,गुलाल उड़ने लगे हैं
ढोल नगाड़े बजने लगे हैं

ठंडाई,गुझिया ,मिठाई बनने लगीं हैं
घर घर में खुशियाँ मनने लगी हैं
चारों और उल्लास ,उमंग छाया है
क्योंकि होली जैसा प्यारा त्यौहार आया है
सारे गम और परेशानियां भूल जाओ
इस रंगों के त्यौहार में खो जाओ
दुश्मन को भी दोस्त बनाओ
प्यार से रंग लगाकर गले लगाओ
ये त्यौहार ही हमारी भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं
इसीलिए ये हमारे दिल के बहुत करीब हैं
जो प्यार और अपनापन की सीख सिखाते हैं
दुश्मन को भी दोस्त और परायों को भी अपना बनाते हैं
हमें इन्हें ख़त्म नहीं होने देना है
गर्व से इसके बारे में नई पीढ़ी को बताना है
Happy holi
चारों तरफ मस्ती सी छाई है
लगता है नजदीक ही होली आई है
रंग ,गुलाल उड़ने लगे हैं
ढोल नगाड़े बजने लगे हैं
घर घर में खुशियाँ मनने लगी हैं
चारों और उल्लास ,उमंग छाया है
क्योंकि होली जैसा प्यारा त्यौहार आया है
इस रंगों के त्यौहार में खो जाओ
दुश्मन को भी दोस्त बनाओ
प्यार से रंग लगाकर गले लगाओ
ये त्यौहार ही हमारी भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं
इसीलिए ये हमारे दिल के बहुत करीब हैं
जो प्यार और अपनापन की सीख सिखाते हैं
दुश्मन को भी दोस्त और परायों को भी अपना बनाते हैं
हमें इन्हें ख़त्म नहीं होने देना है
गर्व से इसके बारे में नई पीढ़ी को बताना है
Happy holi
शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012
भविष्य का सपना
मन पखेरू उड़ने लगा है
नए नए सपने संजोने लगा है
दिल में एक नया एहसास उमंगें ले रहा है
नई पीढ़ी का भविष्य भी अब सुनहरा हो रहा है
एक जिम्मेदारी जो अब अपनी मंजिल पा रही है
आँखों में नए-नए सपने और अरमान जगा रही है
जल्द ही वो दिन आयेगा जब वो अपनी मंजिल पा जाएगी
अपने नए संसार में सुखी ,खुश और मस्त हो जाएगी
उसके सुख में ही हम अपना सुख पा जायेंगे
उसके उल्लास और उमंग में हम भी खो जायेंगे
जब वो अपनी अगली पीढ़ी को लेकर खुशी-ख़ुशी आएगी
उसकी मीठी मीठी और प्यारी किलकारी से घर गुन्जाएगी
तो ऐसा लगेगा की जीवन सम्पूर्ण हो गया
सारे जहाँ का सुख हमको मिल गया
जिम्मेदारियां जब अपनी मंजिल पा जाएँगी
अपनी सुखी और प्यारी दुनिया बसाएंगी
फिर हम अपने कर्तव्यों से मुक्त हो जायेंगे
एक दूसरे में पूरी तरह खो जायेंगे
अपनी अधूरी इच्छाओं और शोकों को पूर्ण करेंगे
और सिर्फ और सिर्फ एक दुसरे के लिए जियेंगे
मन पखेरू उड़ने लगा है
नए-नए सपने संजोने लगा है
बुधवार, 11 जनवरी 2012
दुनिया की सोच
दुनिया की सोच
जिंदगी की तन्हाइयों से डर लगता है
भीड़ में भी जब अकेले हो जाते हैं हम
तो अपनी ही परछाइयों से डर लगता है
दुनिया की सोच निराली हो रही है
अब तो अपनी ही सोच से भी डर लगता है
खून के रिश्ते भी स्वार्थी हो रहे है
अब तो अपने खून से भी डर लगता है
दुनिया की भीड़ में एक अपने को तरसते हैं हम
अब तो अपने को अपनाने से भी डर लगता है
सब कुछ करने के बाद भी कुछ नहीं मिलता
अब तो किसी के लिए कुछ करने से भी डर लगता है
अच्छाई में भी बुराई देखते हैं लोग
अब तो अच्छाई करने से भी डर लगता है
जन संख्या ज्यादा और इन्सानो की संख्या कम हो रही है
अब तो इंसानों को इंसानों से भी डर लगता है
हर तरफ अच्छाई पर बुराई की जीत हो रही है
अब तो भगवान् पे विस्वास करने से भी मन डरने लगता है
ये दुनिया और इंसानों की सोच इतनी दूषित हो रही है
की अब तो इस दुनिया में रहने में भी डर लगता है
इंसानों के विचार और वातावरण इतना ख़राब हो रहा है
की अब तो दुनिया के सर्वनाश होने का डर लगने लगता है
शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011
फेस-बुक क्या है ?
फेस-बुक क्या है ?
मंगलवार, 29 नवंबर 2011
अनोखी बेटी
अनोखी बेटी
| दिशा वर्मा |
आज मैं आप सबको एक ऐसी बेटी के त्याग और अपने माता पिता के लिए कुछ भी करने का जज्बा रखने वाली बहुत बहादुर और बेमिसाल बिटिया की सच्ची कहानी बताने आई हूँ /आप पदिये और अपनी राय जरुर दीजिये की आज भी जब हमारे देश में कन्याओं को गर्भ में ही मारने की घटनाओं में दिन पर दिन बढोतरी हो रही है और लड़कियों को बोझ समझा जाता है /वहां ऐसी बेटी ने एक मिसाल कायम की है /
ये प्यारी सी बेटी दिशा वर्मा हमारे बहुत ही करीबी और अजीज पारिवारिक दोस्त श्री मनोज वर्मा और श्रीमती माधुरी वर्मा की है /इनकी दो बेटियाँ हैं /श्री मनोजजी की तबियत बहुत ख़राब थी ,उनका लीवर ७५% ख़राब हो गया था /उनको लीवर ट्रांसप्लांट की जरुरत थी .उनकी हालत इतनी ख़राब थी की वो कोमा में जा रहे थे /मेरी दोस्त माधुरी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो किससे बोले की कोई उसके पति को अपना लीवर दे दे /क्योंकि उसका ब्लूड ग्रुप तो लीवर देने के लिए मैच ही नहीं कर रहा था / ऐसी हालत में मैं उनकी बहन श्रीमती नीलू श्रीवास्तव जी को भी नमन करना चाहूंगी जो अपने भाई की खातिर आगे आईं और उसका जीवन बचाने के लिए अपना जीवन जोखिम में डालकर लीवर देने के लिए तैयार हो गईं /फिर उनके सारे मेडिकल टेस्ट हुए परन्तु दुर्भाग्यबस वह मैच नहीं हो पाए जिस कारण वो अपना लीवर नहीं दे पायीं /फिर सवाल उठ पडा की अब क्या होगा सारा परिवार चिंता में डूब गया की अब श्री मनोज जी का क्या होगा/ ऐसे समय में जब सारा परिवार दुःख के अन्धकार में डूबा था ये बेटी दिशा जिसको अभी १८ वेर्ष की होने में भी कुछ समय था एक उजली किरण के रूप में आगे आई उसने कहा की मैं दूँगी अपने पापा को लीवर /उसने अकेले

ही जा कर डॉ. से बात चीत की /डॉ. उसके जज्बात और हिम्मत देखकर हैरान रह गए फिर उन्होंने उसे समझाया भी की बहुत बड़ा operation होगा जो १६ घंटे चलेगा और operation के बाद जो काफी risky भी है और तुम्हारे पेट को काटने से उस पर एक हमेशा के लिए बड़ा सा निशान भी बन जाएगा /उसे तरह तरह से समझाया की उस की जान भी जोखिम में पड़ सकती है परन्तु वो बहादुर बेटी बिलकुल नहीं घबराई ना डरी और अपने पापा के लिए उसने ना अपनी जान की और ना इतने बड़े operation की परवाह की और वो अपने
ही जा कर डॉ. से बात चीत की /डॉ. उसके जज्बात और हिम्मत देखकर हैरान रह गए फिर उन्होंने उसे समझाया भी की बहुत बड़ा operation होगा जो १६ घंटे चलेगा और operation के बाद जो काफी risky भी है और तुम्हारे पेट को काटने से उस पर एक हमेशा के लिए बड़ा सा निशान भी बन जाएगा /उसे तरह तरह से समझाया की उस की जान भी जोखिम में पड़ सकती है परन्तु वो बहादुर बेटी बिलकुल नहीं घबराई ना डरी और अपने पापा के लिए उसने ना अपनी जान की और ना इतने बड़े operation की परवाह की और वो अपने
निर्णय पर अडिग रही /फिर उसने इंटर-नेट और अपने चाचा जो एक डॉ.हैं से लीवर ट्रांसप्लांट के बारे में सब कुछ समझ लिया और अपने को इस operation के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह तैय्यार कर लिया और बड़ी हिम्मत से इतने बड़े operation का सामना किया /भगवान् भी उस बेटी की त्याग की भावना और हिम्मत के सामने हार गए और
operation सफल हुआ और उसके पिता को दूसरा जीवन मिला /भगवान् ऐसी बेटी हर घर में दे जिसने अपने पिता के लिए इतना बड़ा त्याग किया जो शायद दस बेटे मिलकर भी नहीं कर सकते थे /और वो हमारे देश की सबसे कम उम्र की लीवर डोनर भी बन गई / यह हम सबके जीवन की अविस्मरनीय घटना है जिसको याद करके आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं /आज वो बेटी इंजिनियर बन गई है और Infosys जैसी multi-national कंपनी में काम कर रही है /उसके पापा बिलकुल ठीक हैं और एक सामान्य जीवन जी रहे हैं /
ऐसी प्यारी बेटी को में नमन करती हूँ और आप सभी का भी उसकी आने वाली जिंदगी के लिए आशीर्वाद चाहती हूँ /और यह कहना चाहती हूँ की बेटे की चाह में बेटी को गर्भ में मत मारो क्योंकि दिशा जैसी बेटियां अपने माता पिता के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं करतीं /उनमे से कौन सी बेटी दिशा बन जाए क्या पता /उसके बाद उसे अपने पापा की हालत से प्रेरणा मिली और दूसरों की परिस्थिति समझने का जज्बा मिला जिसके कारण उसने eye donation कैंप में जा कर अपनी आंखें दान करने का फार्म भरा /दिशा को तथा उसके माता पिता को भगवान् हमेशा खुश ,स्वस्थ एवं सुखी रखे बस यही कामना है /
ऐसी करोड़ों में एक अनोखी बेटी को ,मेरा शत शत नमन आशीर्वाद /
ऐसी करोड़ों में एक अनोखी बेटी को ,मेरा शत शत नमन आशीर्वाद /
दिशा अपने मम्मी पापा (श्री मनोज वर्मा)और बहन के साथ
operation के एक साल बाद
happy family
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