रावण की अयोध्या
आज राम की नहीं रावणों की अयोध्या हो रही है
क्योंकि रावणों की ही मनमरजी से ही अयोध्या चल रही है
जो जितना दुष्ट ,भ्रष्ट,पापी ,धोखेबाज है
उतना ही बड़ा राजा ,नेता और धर्मराज है
मर्यादा पुर्षोत्तम राम तो अब नादान है
उसकी मर्यादा,ईमान,का नहीं कोई कद्रदान है
आज ऐसे इंसान बेवकूफ कहलाते हैं
आज ऐसे इंसान बेवकूफ कहलाते हैं
उनकी इमानदारी और उसूलों का सब मजाक उडाते हैं
माता पिता की आज्ञा नहीं मानने में अपनी शान समझते हैं
उनको वृदा आश्रम भेजने से भी नहीं हिचकते हैं
पैसा भगवान् हो रहा है ,हर कोई उसका गुलाम हो रहा है
रिश्तों की यहाँ कोई बहुत कीमत नहीं रह गई
अहम् ,जलन ,धोखेबाजी जैसी बुराइयाँ अजीज हो गई
भाई भाई के चरण छूने की जगह गला काट रहे हैं
7 टिप्पणियां:
बहुत सुन्दर आद्रेय -
आभार -
मर्जी रावन की चले, खले देश संसार |
नारि-हरण हो राम जी, सुनिए गहन पुकार |
सुनिए गहन पुकार, दुष्ट पापी हैं छाये |
नर वानर हलकान, अयोध्या कौन बचाए |
देते रिश्ते चीर, चीर हरते खुद दर्जी |
आया राक्षस राज, चले इनकी ही मर्जी ||
बहुत प्रभावी घटना..
समसामयिक परिस्थितियों पे वार करती बहुत उम्दा रचना |
आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट कि चर्चा बुधवार (28-11-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
सूचनार्थ |
बहुत अच्छी प्रस्तुति्!
बहुत दिनों बाद आपकी लेखनी पढ़ी .....आशा है अब निरंतरता बनी रहेगी ....समसामयिक एवं प्रभावी प्रस्तुति .........अच्छा लिखा है ....!!
यहाँ तो रावण और दुःशासन सब इकट्ठे हो गये हैं !
बहुत खूब प्रेरणा जी ,आज की विसंगतियों को दर्शाई एक उत्तम रचना!
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