रविवार, 19 अगस्त 2012

देखो चाँद आया

                                                       मेरे सारे ब्लोगर्स साथियों को ईद -मुबारक


देखो चाँद आया 




देखो चाँद आया 
ईद का चाँद निकल आया
सब तरफ खुशियों का उल्लास छाया 
ईद मुबारक -ईद मुबारक का शोर गरमाया    
मुसलमान भाई आपस में गले मिल रहे हैं 
एक दुसरे की  दुआ -क़ुबूल कर रहे हैं

बिना पानी -बिना खाने के रोजा रखते हैं 
एक महीने कठिन तपस्या करते हैं 
रमजान के पवित्र महीने में खुदा की इबादत करते हैं
तो अल्लाह-ताला भी इन पर पूरी नजरें इंनायत रखते हैं 
ईद के दिन हजारों की संख्या में जामा मस्जिद में इकट्ठा होते हैं 


और सफेद कपड़ों में एक साथ नमाज अदा करते हैं 
उस समय जब सब साथ साथ उठते हैं ,बैठते हैं, झुकते हैं  
तो सब एक सूत्र में बंधे शांति के दूत नजर आते हैं 
वो द्रश्य इतना नयनाभिराम होता है की    
आँखों में शान्ति और सुकून भर जाता है 
हिन्दू भाई भी अपने मुसलमान भाइयों के लिए ईद की दावत रखते हैं 
और सब साथ मिलकर खाते -पीते ईद की खुशियाँ मनाते  हैं 
 कुछ स्वार्थी और लालची लोग अपने स्वार्थ के लिए इन भाइयों को आपस में लड़वाते हैं 
और उन्हें धर्म के नाम पर उकसाकर इस देश की शान्ति भंग करवाते हैं 
अब हमको ये समझना है कि रमजान मे "राम" है और दीवाली में भी है "अली "
इसीलिए अब हमें किसी के भी कहने पर नहीं लेना है एक दुसरे की बलि 
सारे मुल्कों को रखना है आपस में भाईचारा 
अब रहेगा सदा यही मकसद हमारा 
सारी दुनिया में अमन -चैन कायम रखना है 
इस खूबसूरत दुनिया का विनाश नहीं करना हैं 


HAPPY - EID 
 


मंगलवार, 14 अगस्त 2012

स्वतन्त्रता दिवस

 

स्वतन्त्रता दिवस 


65वर्ष पूरे हुए हमें स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए 
हम  खुश हैं की हम स्वतंत्र हुए 
हम स्वतंत्र हुए महंगाई .चोरबाजारी 
भ्रष्टाचार, बेरोजगारी बढ़ाने को 
हम स्वतंत्र हुए देश का  काला धन 
देश से बाहर जमा करवाने को 
हम स्वतंत्र हुए अपने  ही देश के किसानो को 
आत्महत्या करवाने को 
हम स्वतंत्र हुए अपने ही देश की  औरतों को  सरेआम
 बेइज्जत करके अपनी मर्दानगी दिखाने को 
हम स्वतंत्र हुए राजनीति के नाम पर अपने ही 
देश की इज्ज़त उछालने को 
हम स्वतंत्र हुए अपने देश की सता          
  गुण्डे ,मवालिओं ,लूटेरों को सोंपने को 
हम स्वतंत्र हुए देश के शहीदों द्वारा दी गई 
अपने प्राणों की कूर्बानी  ब्यर्थ करने को  
फिर भी हम खुश हैं कि हम स्वतंत्र  हुए 
हम स्वतंत्र हैं ,हम स्वतंत्र हैं 
यह कहकर अपने दिल को समझा  रहे हैं  
हर स्वतंत्रता  दिवस पर खुशियाँ मना रहे हें  
अपनी ही  बर्बादी का  जश्न मना कर 
दुनिया को दिखा रहे हैं 
अपने दर्दों गम की श्याही को अपनी खुशियों 
में  छूपा रहे हैं 
काश हम अंग्रेजों की गुलामी से  स्वतंत्र ही ना होते  
 तो अपनो के द्वारा अपने ही देश मे परतंत्र ना होते 
 वाह भारतवासी तेरी  सहनशक्ति का जबाब  नहीं 
जबकि तेरी  जान की कीमत इस देश में कुछ भी नहीं 
हे !भारतवासी तुझे सलाम  है । 
हे !भारतमाता तुझे सलाम है 
    . 

शनिवार, 11 अगस्त 2012

सुरक्षा नारी की

सुरक्षा नारी की

इंसान नहीं कोई वस्तु है वो
किसी भी सामान से बहुत सस्ती है वो
कैसे भी किसी ने भी उसका उपयोग किया
जिसने चाहा जब चाहा उसको बेइज्जत किया
बेइज्जत होकर भी अपना ही चेहरा छुपाती है वो      
अपनों से भी सहानुभूति की जगह दुत्कारी जाती है वो
कोई और अपराध में अपराधी अपना मुंह छुपाता है
ये ऐसा अपराध है इसमें सहनेवाला ही अपना सिर झुकाता है
आज नई सदी में नारी कहीं भी सुरक्षित नहीं है
उसकी इज्जत की कोई कीमत नहीं हैं
छोटी बच्ची हो या बूढी औरत सबको हवश के 
शिकार बना रहे हैं 
पुरुष इंसान नहीं वासना के पुजारी बन हैवान हो रहे हैं  
जिस देश में बच्चियों और औरत को देवी का दर्जा दिया जाता है   
उसी देश में उनके साथ इतना घ्रणित कर्म किया जाता है 
उनके कपडे ,पहनावे ,रहन -सहन को दोष दे रहे हैं 
अपनी गन्दी मानसिक सोच को नहीं बदल रहे हैं    
कोई सरकार कोई कानून इस जुर्म को नहीं रोक पा रहा है 
दिन -प्रतिदिन ये घ्रणित जुर्म बढ़ता जा रहा है 
हम औरतों को ही एकजूट होकर इसके खिलाफ लड़ना होगा 
और अपने को इस शारीरिक और  मानसिक यंत्रणा से बचाना होगा 
कुछ आदमी अपनी ताकत का नाजायज फायदा उठा रहे हैं  
औरतें भी इंसान हैं ये समझ नहीं पा रहे हैं 
जिस दिन औरत ने सच मे दुर्गा माँ का रूप रखा 
एक भी राक्षस इस धरती पर नहीं बच पायेगा 
पापियों अपने पापों को इतना मत बढाओ 
उसके सोये हुए कोप को मत जगाओ 
नहीं तो इस दुनिया का हो जाएगा नाश 

हर तरफ होगा सिर्फ विनाश ही विनाश 







 



   

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

Choti Choti Gaiya Chote Chote Gwal (Shri Krishna Bhajan)



मेरे सारे ब्लोगर साथियों को जन्माष्टमी पर्व की बहुत बहुत  शुभकामनायें 

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

होली आई  रे  

फागुनी बयार चलने लगी है 
फागुन ऋतू आई है 
मोसम सुहाना होने लगा है 
डेसू के फूलों की लालिमा छाई है         
प्रेमियों के अरमान मचलने लगे हैं 
वैवाहिक जोड़े भी नए रंग में रंगने लगे हैं
सबपे प्रेम रंग छाने लगा है
भवंरा भी फूलों पर मंडराने लगा है
चारों तरफ मस्ती सी  छाई है
लगता है नजदीक ही होली आई है
रंग ,गुलाल उड़ने लगे हैं
ढोल नगाड़े बजने लगे हैं
ठंडाई,गुझिया ,मिठाई बनने लगीं हैं 

घर घर में खुशियाँ मनने लगी हैं
                           चारों और उल्लास ,उमंग छाया है            
                       क्योंकि होली जैसा प्यारा त्यौहार आया है 
                                सारे गम और परेशानियां भूल जाओ 
                             इस रंगों के त्यौहार में खो जाओ 
                              दुश्मन को भी दोस्त बनाओ
                           प्यार से रंग लगाकर गले लगाओ 
ये त्यौहार ही हमारी भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं
इसीलिए ये हमारे दिल के बहुत करीब हैं
जो प्यार और अपनापन की सीख सिखाते हैं 
दुश्मन को भी दोस्त और परायों को भी अपना बनाते हैं 
हमें इन्हें ख़त्म नहीं होने देना है 
गर्व से इसके बारे में नई पीढ़ी को बताना है     

Happy holi 


      

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

भविष्य का सपना 
मन पखेरू उड़ने लगा है 
नए नए सपने संजोने लगा है 
दिल में एक नया एहसास उमंगें ले रहा है 
नई पीढ़ी का भविष्य भी अब सुनहरा हो रहा है 
एक जिम्मेदारी जो अब अपनी मंजिल पा रही है 
आँखों में नए-नए सपने और अरमान जगा रही है 
जल्द ही वो दिन आयेगा जब वो अपनी मंजिल पा जाएगी 
अपने नए संसार में सुखी ,खुश और  मस्त हो जाएगी 
उसके सुख में ही हम अपना सुख पा जायेंगे 
उसके उल्लास और उमंग में हम भी खो जायेंगे 
जब वो अपनी अगली पीढ़ी को लेकर खुशी-ख़ुशी आएगी  
उसकी मीठी मीठी और प्यारी किलकारी से घर गुन्जाएगी  
तो ऐसा लगेगा की जीवन सम्पूर्ण हो गया 
सारे जहाँ का सुख हमको मिल गया 
जिम्मेदारियां जब अपनी मंजिल पा जाएँगी 
अपनी सुखी और प्यारी दुनिया बसाएंगी 
फिर हम अपने कर्तव्यों से मुक्त हो जायेंगे 
एक दूसरे में पूरी तरह खो जायेंगे 
अपनी अधूरी इच्छाओं और शोकों को पूर्ण करेंगे 
और सिर्फ और सिर्फ एक दुसरे के लिए जियेंगे 
मन पखेरू उड़ने लगा है 
नए-नए सपने संजोने लगा है 
 

बुधवार, 11 जनवरी 2012

दुनिया की सोच

    दुनिया की सोच  
  जिंदगी की तन्हाइयों से डर लगता है 
भीड़ में भी जब अकेले हो जाते हैं हम 
तो अपनी ही परछाइयों से डर लगता है 
दुनिया की सोच निराली हो रही है 
अब तो अपनी ही सोच से भी डर लगता है 
खून के रिश्ते भी स्वार्थी हो रहे है 
अब तो अपने खून से भी डर लगता है 
दुनिया की भीड़ में एक अपने को तरसते  हैं हम 
अब तो अपने को अपनाने से भी डर लगता है 
सब कुछ करने के बाद भी कुछ नहीं मिलता 
अब तो किसी के लिए कुछ करने से भी डर लगता है 
अच्छाई में भी बुराई देखते हैं लोग
अब तो अच्छाई करने से भी डर लगता है 
जन संख्या ज्यादा और इन्सानो की संख्या कम हो रही है 
अब तो इंसानों को इंसानों से भी डर लगता है 
हर तरफ अच्छाई पर बुराई की जीत हो रही है 
अब तो भगवान् पे विस्वास करने से भी मन डरने लगता है
ये दुनिया और इंसानों की सोच इतनी दूषित हो रही है 
की अब तो इस दुनिया में रहने में भी डर लगता है 
इंसानों के विचार और वातावरण इतना ख़राब हो रहा है 
की अब तो दुनिया के सर्वनाश होने का डर लगने लगता है