शनिवार, 7 मई 2011


आज मदर्स डे पर मैं एक महान ,गरिमामय माँ  मदर टेरेसा को अपनी स्वरचित कविता के द्वारा श्रद्धांजलि  अर्पित कर रही हूँ 

     
ममतामयी माँ मदर टेरेसा 
ममतामयी,गरिमामयी  माँ का रूप थीं वो
सफेद साड़ी मैं लिपटी उजली सुबह -२ की धूप थीं वों 
स्नेहिल मुस्कान मुख पर लिए शांति की दूत थीं वो 
सर्वत्र प्यार का प्रसार करने वाली भगवान् की मूरत थीं वो 
निसहाय इंसानों, अनाथ बच्चों  की आश्रयदाता थीं वो 
किसी सत्ता,ऊँचे पदों, और लालच की ना मोहताज थीं वो 
इस दुनिया में इंसानियत की मिसाल थीं वो 
सही मायने में एक महान इंसान थीं वो 
हमारे धन्य-भाग्य  की भारत में बस गईं थीं वो 
भारत में रहने वाली अनमोल "भारत -रत्न" थीं वो 
भारत की ही नहीं सारी दुनिया की मदर थीं वो 
धरती माँ के समान सहनशील माँ मदर टेरेसा थीं वो 
ऐसी माँ को शत-शत नमन करती हूँ मैं 
उनकी महान आत्मा के लिए हर पल दुआ करती हूँ मैं

HAPPY MOTHER'S DAY

गुरुवार, 5 मई 2011

पीढ़ियों का अंतराल




पीढ़ियों  का अंतराल 

आजकल युवा पीढ़ी परयह इल्जाम लगाए जाते हैं की आजकल के युवा बुजुर्गों का आदर नहीं करते उनकी देखभाल नहीं करते उनको समय नहीं देते /
यह एक सोचने वाली बात है /पुरानी पीढ़ी और एक नई पीढ़ी का अंतराल तो है /परन्तु क्या पुरानी पीढ़ी नए जमाने के साथ अपनी सोच ,अपनी आदतें अपना सहयोग कायम रखतीं हैं/हमारे जमाने का गुणगान करने की जगह नए जमाने में हो रहे बदलाव ,को अपनाएँ अपने बच्चों को आजकल के प्रतियोगी ,भाग-दौड़           वाली जिंदगी में कदम से कदम मिला कर चलने में  सहयोग करें/जो काम वो घर में रहकर आराम से कर सकतें हैं उसको करने में संकोच ना करें और ना ही अपना अहम् बीच में लायें /तो उनका समय भी अच्छे से बीतेगा और उनका मान अपने आप बढेगा /आजकल जिस तरह महंगाई दिन पर दिन बढ़ रही है उसमें एक ब्यक्ति की तनख्वा से ग्रहस्थी  चलाना नामुमकिन है तो पति-पत्नी  दोनों को ही बाहर काम करके अपनी ग्रहस्थी  चलाने की जिम्मेदारी उठानी पढती है /पहले नारी को केवल घर के कार्य ही करने होते थे /बाहर के कार्यों से उनको कोई मतलब नहीं होता था /ज्यादा पढ़ी-लिखी भी नहीं होतीं थीं और कुछ उस जमाने का माहौल भी ऐसा था की बैंक के काम बच्चों के स्कूल की फीस वग्हेरा का काम पुरुष ही करते थे /परन्तु आजकल नारी दोहरा  कार्य कर रही है/ग्रहस्थी   के कार्य तो कर ही रही है ,पैसे भी कमा रही है और बैंक,स्कूल बाहर के कार्यों की भी जिम्मेदारी  उठा रही है /उसके बाद घर में उससे यह अपेक्षा  रखना तुम्हारे ज़माने  जैसे ही घर के काम करे तुम्हारी पूरी सेवा करे /तुम जैसे चाहो वैसा ही पहने ओढ़े तो क्या यह संभव है /जो बुजुर्ग इन सब बातों को समझतें हैं /अपने विचारों में परिवर्तन ले आतें है समयानुसार नई पीढ़ी के साथ उनकी समस्या को अपने अनुभव के ज्ञान से सुलझाने में मदद करतें हैं / घर के छोटे -छोटे कामों में हाथ बंटाते हैं बेकार की नुक्ताचीनी नहीं करते /बच्चों की मजबूरी और परेशानियों को समझते हैं वो बुजुर्ग घर में पूरा सम्मान पातें हैं ,और कदम-कदम पर घर के प्रत्येक सदस्य की जरुरत बन जातें हैं /आजकल एकल परिवार वाले युग में और ऐसे माहौल में जहाँ इंसान का इंसान पर भी विश्वास करना मुश्किल हो रहा है /बुजुर्गों का साथ में रहने से बच्चों की सुरक्षा ,घर की सुरक्षा की चिन्ता से मुक्त होकर आराम से पति-पत्नी अपने कार्यों पर जा सकते हैं /आज की पीढ़ी को भी ऐसे बुजुर्गों की पूरी इज्जत करना .उनकी स्वास्थ सम्बन्धी देखभालकरना .उनकी जरूरतों का पूरा ध्यान रखना चाहिए /
अथार्त अगर नए जमाने के साथ ,उसके बदलाव को स्वीकार करते हुए नई पीढ़ी की मजबूरियों को समझते हुए सहयोग करे और नयी पीढ़ी भी पुरानी पीढ़ी को मान सम्मान के साथ उनके अनुभव का लाभ उठाते हुए उनके स्वास्थ का ध्यान रखते हुए अपने कर्तव्यों का ध्यान रखे.तो ये पीदियों में होने वाले विचारों का अंतराल ख़त्म हो जाए /और दोनों पीदियाँ एक दूसरे के बिना रहनें की सोचें भी ना./दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और साथ में रहने से सुरक्षित भी./
साथ में रहने का सुख उठाओ ,एक दूसरे को दिल से अपनाओ 
छोटी-छोटी बातों और अहम्  को भूलकर ,हंसी-खुशी जिंदगी बिताओ  

सोमवार, 2 मई 2011

नया ज़माना

नया ज़माना 
पुराने दीवानों का प्रेम अब पुराना अफ़साना हो गया 
नए दीवानों का प्रेम अब नया फसाना हो गया 
वो हया से झुकी नजरें ,और लाल होते रुखसारों 
का अंदाज पुराना हो गया 
बेहयाई से गलबहियां डालकर घुमना 
अब नया ज़माना हो गया 
हाले दिल बयां करते प्रेम पत्रों को बहानों से भेजने 
का अंदाज पुराना हो गया 
इ-मेल ,और मोबाईल सन्देश से हाले दिल बयां करना 
अब नया ज़माना हो गया 
वो छुप-छुप के नजरें मिलाना ,दिल ही दिल मैं आहें भरने 
का अंदाज पुराना हो गया 
मोबाईल है सबके पास ,पल-पल होती प्यार की बात 
अब नया ज़माना हो गया 
बड़ों की इज्जत करना ,चुपचाप उनके आदेश का पालन करने
का अंदाज पुराना हो गया
बड़ों की बेइज्जती करना ,आँखों मैं आखें डालकर बहस करना
अब नया ज़माना हो गया 
भारतीय संस्कृति ,भारतीय सभ्यता को अपनाने 
का अंदाज पुराना हो गया 
पश्चिमी संस्कृति .पश्चिमी सभ्यता मैं रंगना 
अब नया जमाना हो गया 
काश कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन 

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

मेरी प्यारी माँ

आज मेरी माँ के जन्मदिन के शुभअवसर पर ये रचना मैं अपनी माँ को समर्पित कर रहीं हूँ /भगवान् उनको दीर्घायु प्रदान करे / 

मेरी प्यारी माँ 

दुनिया मैं सबसे न्यारी है मेरी माँ 
बहुत सुंदर बहुत प्यारी है मेरी माँ 
भगवान् पर बहुत विस्वास करती है मेरी माँ 
इसीलिए कैसी भी परिस्थिति मैं घबराती नहीं मेरी माँ 
बिलकुल देवी-स्वरूपा है मेरी माँ 
बहुत सुंदर बहुत प्यारी है मेरी माँ 
अपनी दिनचर्या ,अपने मैं ही ब्यस्त रहती है मेरी माँ 
सबमे अच्छाई देखती ,कभी किसी की बुराई नहीं करती मेरी माँ 
हमेशा अच्छी सीख ,अच्छे सस्कार देती है मेरी माँ 
बहुत सुंदर बहुत प्यारी है मेरी माँ 
दिल मैं बहुत प्यार है पर जताती नहीं मेरी माँ 
मन के भावों को शब्दों मैं ब्यक्त नहीं कर पाती मेरी माँ 
इसीलिए गलतफमी की शिकार बन जाती है मेरी माँ 
बहुत सुंदर बहुत प्यारी है मेरी माँ 
हमेशा सजीं संवरी,एक मनमोहक ब्यक्तित्व है मेरी माँ 
अपनी सुंदरता का अभी भी बहुत ख्याल रखती है मेरी माँ 
मेरे लिए तो मेरा आदर्श मेरी दुनिया है मेरी माँ 
बहुत सुंदर बहुत प्यारी है मेरी माँ 
भगवान् हर जनम मैं इन्हें ही बनाए मेरी माँ 
इतनी दीर्घायु दे की कभी ना बिछड़े मुझसे मेरी माँ 
हमेशा आशीर्वाद और प्यार से गले लगाती रहे मेरी माँ 
बहुत सुंदर बहुत प्यारी है मेरी माँ 
 
  

बुधवार, 27 अप्रैल 2011

जीवन चक्र






जीवन चक्र 

जीवन निरंतर गति से अपने पथ पर है अग्रसर 
उसके अन्दर है हमारी खट्टी मीठी यादों का समुन्दर 
समुंदर की लहरों का आवागमन है चलायेमान 
हमारे जीवन का उतार-चदाव, सुख-दुःख भी है उसी के सामान
खिलखिलाते निश्चिन्त बचपन की यादें अनमोल 
परिवार के साथ पल-पल गुज़ारे लम्हें बेमोल
वो नवयोवन आने का मधुर-मधुर आभाश
शारीरिक परिवर्तन और जिज्ञासाओं से भरा एह्सास      


                                          सुन्दर-सुन्दर सपनों मैं डूबा मन मदहोश
                                             दुनिया को अपनी मुट्ठी मैं करने का जोश

योवन के आगमन पर एक हमसफ़र का आना 
प्रत्येक सुख-दुःख मैं उसका साथ निभाना 
फिर यह जीवन सिर्फ अपना नहीं विभिन्न रूपों मैं बट जाना
ज़िन्दगी की नयी जिम्मेदारियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाना 
जीवन का पहिया निर्वाध रूप से इसी तरह चलते जाना 
यही है हमारे जीवन चक्र का सार 
जिसमे रचा-बसा है हमारे सुख-दुःख का भंडार


   

  

रविवार, 24 अप्रैल 2011

हमारा देश महान

हमारा  देश महान


हमारा देश महान, कहना कितना आसान
चारों तरफ चोरबाजारी ,कालाबाजारी ,भ्रस्टाचारी है पनप रही 
मिलावटी वस्तुओं की बिक्री आराम से हो रही 
इंसान की जिन्दगी से खेलना 
यहाँ कितना आसान 
फिर भी हमारा देश महान 
औरतों को देवी कहते हैं 
पर उसकी इज्जत सरेआम उछाल देतेहैं
बच्चियां ,लडकियां,औरतें घर मैं तक सुरक्षित नहीं जहां
अत्याचार करना,तेज़ाब फेकना,नहीं तो गोली मार देना 
यहाँ कितना आसान 
फिर भी हमारा देश महान 
महंगाई इतनी बढ़ रही 
गरीबों को दाल-रोटी भी खाना मुश्किल पड़ रही 
किसान कर रहे आत्महत्या जहां 
किसी की भी नहीं सुनवाई यहाँ 
जुर्म करनेवाले नेताओं को शान से रहना 
यहाँ कितना आसान 
फिर भी हमारा देश महान 
जो सोच रहें हैं सिर्फ अपनी भलाई 
        देश की सब तरफ से हो रही तबाही
गुंडों,चोरों का साम्राज्य जहां 
नेताओं के लिए नहीं कोई कानून यहाँ 
उनके लिए कोई भी कानून तोड़ना 
यहाँ कितना आसान 
फिर भी हमारा देश महान 
        
 

रविवार, 17 अप्रैल 2011

दर्पण

आज-कल  मेरा अक्श  दर्पण में  धुंधला 
नजर आता है 
दर्पण में  खराबी है या  मेरी नज़रों में 
समझ नहीं  आता  है 
बार-बार दर्पण को साफ़ कराती हूँ 
अपना चेहरा भी पानी से धोती हूँ 
पर जब भी दर्पण में देखूँ 
अपने अक्श को धुंधला  ही  पाऊँ 
एक दिन एक बच्चे को उसी दर्पण 
के सामने खड़ा पाया 
तो उसका अक्श दर्पण में 
साफ़ नजर  आया 
ना तो ये नज़रों की खराबी है 
ना दर्पण की 
ये खराबी  तो है हमारे 
अंतर्मन  की 
इतने सालों में  जो छल,कपट ,अहम् जैसी बुराइयां 
हमारे अंतर्मन में  छाती  जाती हैं 
वह अब हमारे अंतर्मन के साथ -साथ 
हमारे अस्तित्व में भी नजर आती हैं 
दर्पण तो बिलकुल स्वच्छ है 
हमारा अस्तित्व ही धुंधला गया है 
हम अपना अंतर्मन स्वच्छ कर लें
तो हमारा अस्तित्व भी साफ़ नजर आयेगा 
फिर कभी वो धुंधला नजर नहीं आयेगा   

धूप- छावं


धूप अधिक ,छावं कम है जिंदगी
जिम्मदारियों को मंजिलों तक 
                                    पहुंचाने की चाह है जिंदगी 
रात -दिन मेहनत करके ,आधी से ज्यादा 
                                  धूप में  निकल जाती है जिंदगी 
इसी आशा में की जिम्मेदारियों से मुक्त होने पर 
                        ठंडी-ठंडी छावं में गुजर जायेगी जिंदगी 
पर जब जिम्मेदारियां मंजिल पाकर मुक्त होकर
                              हवा हो जातीं हैं 
तो दुःख से ठंडी-ठंडी छावं की आशा लिए 
                     दुनिया से विलुप्त हो जाती है जिंदगी    
      
        

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

corruption in india







आज हमारे भारत देश में भ्रष्टाचार जिस तरह एक लाइलाज  बीमारी की तरह हर जगह  फैल रही है.उसमे सबसे ज्यादा जिम्मेदार   हमारे देश के नेता जो सबसे ज्यादा जिम्मेदार नागरिक और जिम्मेदार पदों पर आसीन हैं .उन्हें ही जिम्मदार ठराया जाएगा |श्री अन्ना हज्जारेजी ने जिस आन्दोलन की शुरुआत  अभी की है उसे तो बहुत साल पहले ही शुरू हो जाना चाहिये था |  देश के हालत इतने बिगड़ गए हैं की अब सुधार होना नामुमकिन है | सबसे पहले तो हमें इन नेताओं के लिये भी कुछ नियम बंनाने पड़ेंगे |
१.इनके लिए भी अवकाश प्राप्ति की एक उम्र निश्चित करनी पड़ेगी |
२.परिवारवाद ख़त्म करना होगा |
३.इनके लिए भी जिस तरह से सरकारी अधिकारिओं की हर साल गोपनीय रिपोर्ट लिखी जाती है.इसी तरह इनके किया हुए काम का लेखा जोखा रखने के लिया एक कमेटी बंनानी चाहिये |  उसकी रिपोर्ट के आधार पर उसे आगे के काम के लिया निउक्त करना चाहिये |
४.अपनी सम्पति का ब्योरा हर साल इनको देना  चाहिये.|
५.पढाई के लिये भी कम से कम स्नातक तो होना ही चाहिये
६.सहूलियतें उतनी  ही  दें जितनी जरुरत हों.सारे रिश्तेदार पालने की जिम्मेअदारी सरकार की थोड़ी है.
अगर देश के नेता सुधर   गए तो उनके आधीन सरकारी तंत्र अपने आप सुधर जाएगा |
अन्ना हम आपके साथ हैं आप ने बहुत अच्छा   मुद्दा  लेकर आन्दोलन सुरु किया है.भगवान् इन नेताओं को सदबुधि दे |  

                             साथी हाथ बढाना, भारत से भ्रस्टाचार को है मिटाना 
                                   एक अकेला थक जाएगा,मिलकर हाथ बढाना  

शनिवार, 12 मार्च 2011

रंग बिरंगी होली आई





रंग बिरंगी आई होली 

फागुन ऋतू आई है
होली की मस्ती छाई  है
ढोल, नगाड़े बजने लगे हैं
रंग,गुलाल उड़ने लगें हैं
इस त्यौहार का रंग और अंदाज है निराला 
छोटे-बड़े का भेद मिटाकर सबको एक रंग मैं रंग डाला
 लाल,पीले,नीले,हरे रंग से रंग दो सबके तन को
और प्यार से गले मिलकर रंग लो अपने मन को
इस पावन पर्व पर कुछ ऐसा अपनापन और मदहोशी छाती है 
की वर्षों पुरानी दुश्मनी भी दोस्ती मैं बदल जाती है


होलिका दहन पर  होली जलाना बुराई पर अच्छाई  की जीत का प्रतीक है
हमारे दिल में जल रही अहम् ,इर्ष्या,द्वेष,की होली जलाने से 
हमारी अंतर्मन की जीत हैं
इस रंगीले त्यौहार में तन के साथ मन भी रंगीला हो  जाता है
नए-नए एहसास और उमंगों से जीवन को सराबोर कर जाता है
सबका जीवन इसी तरह रंगीन खुशिओं से महकता रहे और पूर्ण हो सब मनोकामनाएं
होली के पावन पर्व पर यही हैं हमारी सबको ढेर सारी शुभकामनाएं

HAPPY HOLI