बुधवार, 27 अप्रैल 2011

जीवन चक्र






जीवन चक्र 

जीवन निरंतर गति से अपने पथ पर है अग्रसर 
उसके अन्दर है हमारी खट्टी मीठी यादों का समुन्दर 
समुंदर की लहरों का आवागमन है चलायेमान 
हमारे जीवन का उतार-चदाव, सुख-दुःख भी है उसी के सामान
खिलखिलाते निश्चिन्त बचपन की यादें अनमोल 
परिवार के साथ पल-पल गुज़ारे लम्हें बेमोल
वो नवयोवन आने का मधुर-मधुर आभाश
शारीरिक परिवर्तन और जिज्ञासाओं से भरा एह्सास      


                                          सुन्दर-सुन्दर सपनों मैं डूबा मन मदहोश
                                             दुनिया को अपनी मुट्ठी मैं करने का जोश

योवन के आगमन पर एक हमसफ़र का आना 
प्रत्येक सुख-दुःख मैं उसका साथ निभाना 
फिर यह जीवन सिर्फ अपना नहीं विभिन्न रूपों मैं बट जाना
ज़िन्दगी की नयी जिम्मेदारियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाना 
जीवन का पहिया निर्वाध रूप से इसी तरह चलते जाना 
यही है हमारे जीवन चक्र का सार 
जिसमे रचा-बसा है हमारे सुख-दुःख का भंडार


   

  

11 टिप्‍पणियां:

Dr. Ashok Kumar Mishra ने कहा…

संवेदनाओं को विस्तार देेता है आपका शब्द संसार। अच्छा लिखा है आपने।

मैने अपने ब्लाग पर एक कविता लिखी है-शब्दों की सत्ता। समय हो तो पढ़ें और प्रतिक्रिया भी दें।

http://www.ashokvichar.blogspot.com/

Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत सुन्दरता से वर्णन किया है जीवन चक्र का ...!!
इसी तरह अग्रसर होता रहे ..
शुभकामनाएं .

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

जीवन चक्र को बखूबी रेखांकित किया है आपने.

सादर

केवल राम ने कहा…

फिर यह जीवन सिर्फ अपना नहीं विभिन्न रूपों मैं बट जाना
ज़िन्दगी की नयी जिम्मेदारियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाना


जीवन को बहुत सुंदर शब्दों के माध्यम से परिभाषित किया किया है आपने .....आपकी कविता जीवन को नए अर्थ और नया स्वरूप देती है .....आपका आभार इस सुंदर और सार्थक रचना के लिए आशा है आप अपने लेखन से ब्लॉग जगत को समृद्ध करते रहेंगे ......हार्दिक शुभकामनायें

Unknown ने कहा…

आपका आमंत्रण स्वीकार "जीवन चक्र " यहाँ ले आया . सुन्दर वर्णन . तराश होने पर हीरे सा चमकेगा , लिखना जारी रखें . विचार की बहुत गहरे है आपके लेखन में .

हल्ला बोल ने कहा…

यदि आप हिन्दू है तो हिन्दू कहलाने में संकोच कैसा. अपने ही देश में कब तक अन्याय सहेंगे. क्या आपको नहीं लगता की हमारी चुप्पी को लोग हमारी कायरता मानते हैं. एक भी मुसलमान बताईये जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कहता हो. फिर हम ही क्यों..? सच लिखने और बोलने में संकोच कैसा. ?
यदि आप भारत माँ के सच्चे सपूत है. धर्म का पालन करने वाले हिन्दू हैं तो
आईये " हल्ला बोल" के समर्थक बनकर धर्म और देश की आवाज़ बुलंद कीजिये... ध्यान रखें धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले दूर ही रहे,
अपने लेख को हिन्दुओ की आवाज़ बनायें.
इस ब्लॉग के लेखक बनने के लिए. हमें इ-मेल करें.
हमारा पता है.... hindukiawaz@gmail.com
समय मिले तो इस पोस्ट को देखकर अपने विचार अवश्य दे

देशभक्त हिन्दू ब्लोगरो का पहला साझा मंच - हल्ला बोल

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

बहुत ही सुंदर और भावमयी प्रस्तुति....शुभकामनाएं।

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

JIVAN KO AAPNE BAKHOOBI SAMJHA HAI.
............
ब्लॉdग समीक्षा की 12वीं कड़ी।
अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं का अपमान!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरती से बयाँ किया है जीवन चक्र को ...



कृपया टिप्पणी बॉक्स से वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति....

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

वाह, बहुत सुंदर