सोमवार, 22 अगस्त 2011

Badi der bhai nandlala

25 टिप्‍पणियां:

Anupama Tripathi ने कहा…

sunder geet...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर विडिओ प्रस्तुति।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

Shalini kaushik ने कहा…

sundar प्रस्तुति krishn janmashtmi kee bahut bahut shubhkamnayen

Shalini kaushik ने कहा…

sundar प्रस्तुति krishn janmashtmi kee bahut bahut shubhkamnayen

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

जन्माष्टमी की हार्दिक बधाइयाँ ...शुभकामनायें

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत दोस्त जी .......श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ |

prerna argal ने कहा…

आपका बहुत बहुत धन्यवाद की आपको मेरी पोस्ट पसंद आई /आशा है आगे भी आपके उत्साह बढ़ानेवाले सन्देश मेरी रचनाओं को मिलता रहेगा /आभार /

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सुन्दर विडिओ ...
श्कष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ ...

Urmi ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत! जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें!

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

Wow,its a song of my choice.
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ.

Rakesh Kumar ने कहा…

वाह! बहुत सुन्दर गीत.
'बड़ी देर भई नंदलाला'शब्द सुनते ही
रोमांच हो जाता है.

मेरे ब्लॉग पर भी आपको आये हुए बहुत देर
हो गई है.
मेरा ब्लॉग भी आपकी राह तक रहा हैं.

Shikha Kaushik ने कहा…

bahut sundar prastuti .aabhar

ARE YOU READY FOR BLOG PAHELI -2

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति....
बहुत-बहुत शुभकामनायें.

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत ..जन्माष्टमी की हार्दिक बधाइयाँ ...शुभकामनायें

G.N.SHAW ने कहा…

प्रेरणा अर्गल जी -मै कई बार आप के ब्लॉग पर अनौपचारिक रूप से आ भी चूका हूँ , कई बार टिपण्णी दे चूका हूँ तथा आप के ब्लॉग का समर्थक भी हूँ ! जो भी हो आप का मेरे ब्लॉग पर "अनुशासन "के रूप में कल आना , और अपने ब्लॉग पर औपचारिक रूप से , आने के लिए निमंत्रण देना भी एक सुखद अनुभव सा लगा ! देर आये , दुरुस्त आये ! काश ब्यक्ति प्रेम और दंभ में फर्क समझ पता ! ये तो सही है की इस ब्लॉग जगत में भी प्रेम कम और दंभ ज्यादा है ! खैर क्षमा प्रार्थी हूँ - भाओ- वेश में यह सब कह गया ! मेरे तरफ से भी आप को मेरे ब्लॉग "पोस्ट - जगत "में हार्दिक स्वागत है ! धन्यवाद

ZEAL ने कहा…

bahut sundar geet..aabhaar prerna ji

तेजवानी गिरधर ने कहा…

very nice

www.navincchaturvedi.blogspot.com ने कहा…

मेरे मनपसंद गीत को सुनवाने के लिए शुक्रिया

kumar zahid ने कहा…

सुन नहीं पाया किसी को देख ना पाया
सुना है उस सजीले में सभी कुछ मां कसम क्या था!?

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

दो-तीन बार प्रयास किया … वीडियो देख नहीं पाया … कल फिर अवश्य कोशिश करूंगा …


विलंब से ही सही…
♥ स्वतंत्रतादिवस सहित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !♥
- राजेन्द्र स्वर्णकार

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

दोहों के आगे दोहा
===========
बैनर पर बाहर लिखा, दिखा मुझे "स्वाधीन"।
लेकिन भीतर "बेड़ियाँ", पड़ी हुई प्राचीन॥
==================
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

मनोज कुमार ने कहा…

मुझे यह गीत बहुत अच्छा लगता है।

prerna argal ने कहा…

आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (६) के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आयें और अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ /आप हिंदी के सेवा इसी तरह करते रहें ,यही कामना हैं /आज सोमबार को आपब्लोगर्स मीट वीकली
के मंच पर आप सादर आमंत्रित हैं /आभार /

prerna argal ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद आप सबका की आपने मेरी रचना को पसंद किया और इतने अच्छे उत्साह बढ़ानेवाले सन्देश दिए /आप सबका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को हमेशा ऐसे ही मिलता रहेगा ,यही कामना है /आभार /